अन्तेर्राष्ट्रीय

परमार्थ निकेतन में अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव नौ मार्च से, 80 देशों के 1200 प्रतिभागी

ऋषि टाइम्स न्यूज

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में विश्व शान्ति का आह्वान’ के साथ अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव नौ मार्च से शुरू होगा। परमार्थ निकेत परिवार की ओर से इसकी सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इसमें 80 से अधिक देशों के एक हजार से अधिक योग साधक प्रतिभाग करेंगे।

परमार्थ निकतन परिवार लगभग 80 देशों से आए करीब 1200 योग साधकों का स्वागत करने के लिए पूर्णतः तैयार है। इस प्रतिष्ठित महोत्सव का विधिवत उद्घाटन 9 मार्च, 2026 को उत्तराखंड के माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी द्वारा किया जाएगा।

यह महोत्सव भारत के महान आध्यात्मिक गुरुओं और योग आचार्यों को एक मंच पर लाने का उत्कृष्ट मार्ग है। वर्ष 2017 में भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने इस महोत्सव का उद्घाटन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किया था तथा 2018 में पूर्व उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडू जी ने इसका उद्घाटन प्रत्यक्ष रूप से किया था।

परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती तथा इंटरनेशनल योगा फेस्टिवल की निदेशक पूज्या साध्वी भगवती सरस्वती विश्वभर से आए योग आचार्यों और प्रतिभागियों का अपने हिमालयी आश्रम में अभिनन्दन के साथ उत्तराखंड भारत के दिव्य दर्शन के साथ जोड़ने के निये सतत प्रयासरत हैं। इस वर्ष का महोत्सव योग की सनातन ज्ञान परम्परा को भारत की समृद्ध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत के साथ जोड़ते हुए एक और भी व्यापक, परिवर्तनकारी और प्रेरणादायक अनुभव प्रदान करेगा।

इस वर्ष के महोत्सव की प्रमुख विशेषताओं में शिवा रिया, आनंद मेहरोत्रा, किया मिलर, रूना रिजवी शिवमणि, स्टीवर्ट गिलक्रिस्ट, साध्वी आभा सरस्वती, गंगा नंदिनी, आध्या, डॉ. गणेश राव, डॉ. एच.आर. नागेन्द्र सहित अनेक प्रतिष्ठित वक्ताओं के साथ दिव्य आध्यात्मिक सत्र शामिल होंगे। इसके अतिरिक्त टॉमी रोसेन, एरिका कॉफमैन, मोहन भंडारी, डॉ. इंदु शर्मा सहित अंतरराष्ट्रीय योग गुरुओं द्वारा प्रेरणादायी योग कक्षाएँ आयोजित की जाएँगी।

संध्याकालीन सांस्कृतिक कार्यक्रमों में ड्रम्स शिवमणि और रूना रिजवी, राधिका दास एंड फ्रेंड्स, सुधांशु शर्मा, साइमन ग्लोडे, पद्मश्री कैलाश खेर एवं कैलासा बैंड, कृष्णप्रिया, गुरनिमित सिंह तथा परमार्थ के ऋषिकुमारों द्वारा विशेष योग प्रस्तुतियाँ शामिल होंगी, जो हिमालय की गोद में मंत्र, संगीत और भक्ति की अद्भुत ध्वनि से वातावरण को दिव्य बना देंगी।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि आज जब विश्व विभाजन, संघर्ष और असंतोष की पीड़ा से जूझ रहा है, ऐसे समय में हम योग के माध्यम से सम्पूर्ण वैश्विक परिवार को माँ गंगा के पावन तट और हिमालय की दिव्य गोद में आमंत्रित कर रहे हैं, ताकि यहाँ से वे शांति, सद्भाव और एकात्मता का दिव्य संदेश लेकर जाएँ। उत्तराखण्ड केवल एक भूभाग नहीं, बल्कि योग की भूमि, तप की भूमि, त्याग की भूमि और गहन ध्यान की पवित्र साधना-स्थली है।

साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि यह वह पावन भूमि है जहाँ हजारों वर्षों से ऋषि, मुनि और संत साधना के लिए आते रहे हैं। इंटरनेशनल योगा फेस्टिवल के प्रतिभागियों को यहाँ योग शिक्षकों के साथ-साथ माँ गंगा और हिमालय की दिव्य ऊर्जा का भी अनुभव होता है। यही शिक्षण, स्पर्श और आत्मिक परिवर्तन का संगम दुनिया भर के लोगों को यहाँ आकर्षित करता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *