लोकसभा और राज्य विधान सभाओं में कब मिलेगा महिलाओं को 33 प्रतिशतआरक्षण
सुदीप पंचभैया
देश की महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण कब तक मिलेगा। उत्तराखंड की विधानसभा में 23 महिला विधायक कब दिखेंगी। महिलाओं को सशक्त बनाने और उनकी आबादी के मुताबिक प्रतिनिधित्व की बातों के बीच स्थिति ये है कि लोकसभा में मात्र 15 प्रतिशत और राज्य विधान सभाओं में महिला विधायक मात्र 10 प्रतिशत हैं।
आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस है। दुनिया समेत भारत में महिला हितों की बात हो रही है। सरकार और तमाम संगठन महिलाओं की बेहतरी के लिए बड़े-बड़े दावे कर रही है। इन दावों के बीच नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 (128वां संविधान संशोधन) की यादें ताजा हो रही है। इस कानून को बने हुए तीन साल होने को हैं। इसके मुताबिक लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत (एक-तिहाई) सीटें आरक्षित होंगी। उक्त कानून 15 वर्षों के लिए मान्य होगा।
इसका उद्देश्य राजनीति में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाना है। यहां तक तो ठीक है। मगर, इसको लागू करने की जो शर्त केंद्र की मोदी सरकार ने रखी है उसको लेकर कई सवाल पैदा हो रहे हैं। महिलाओं के लिए लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण जनगणना और परिसीमन के बाद लागू होगा।
जनगणना के आकड़े 2027 तक आने की बात कही जा रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या 2028 से ये कानून पूरी तरह से लागू हो जाएगा। क्या 2029 के आम चुनाव में 33 प्रतिशत लोकसभा की सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो जाएंगी। इस पर अभी दावे के साथ कुछ भी कहना संभव नहीं है।
इसको लेकर राजनीतिक दलों में बहुत अधिक उत्साह देखने को नहीं मिल रहा है। यदि वास्तव में 2029 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 (128वां संविधान संशोधन) लागू हो जाएगा, तो कम से कम राजनीतिक दलों में इसकी हलचल जरूर दिखती। मगर, ऐसा दूर-दूर तक नहीं दिख रहा है। राजनीतिक दलों में इसको लेकर चर्चाएं भी ना के बराबर होती है।
भाजपा ने इसे कानून बनाते समय इसका पॉलिटिकल माइलेज लेने का खूब प्रयास भी किया। मगर, इसे लागू करने की शर्तों के वजह से महिलाओं में भी इसके प्रति बहुत उत्साह देखने को नहीं मिला। हैरान करने वाली बात है कि महिलाओं के लिए आवाज उठाने वाले संगठनों के स्तर से भी इस पर कभी सवाल नहीं उठाया गया कि महिला आरक्षण के लिए ये कैसा कानून बना जिसके लागू होने के लिए तमाम शर्तें लगाई गई हैं। इसमें भी पांच/छह साल का समय लग सकता है।
बहरहाल, महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधान सभाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण कब तक मिलेगा ये कहना संभव नहीं है। हां लोकसभा और राज्य विधान सभाओं में महिलाओं सांसद/ विधायकों की संख्या ना के बराबर है। आधी आबादी से लोकसभा में मात्र 15 प्रतिशत महिला सांसद हैं। राज्य विधानसभाओं में स्थिति और भी खराब है। पूरे देश में कुल विधायकों में महिला विधायकों का प्रतिशत 10 से कम है।
देश के पहले आम चुनाव में पांच प्रतिशत महिला सांसद चुनकर आई थी। 75 साल बाद महिला सांसदों का प्रतिशत 15 तक ही पहुंच सका है। देश के 10 राज्यों में महिला विधायकों का प्रतिशत 10 से अधिक है। इसमें छत्तीसगढ़ में सबसे अधिक 14.44 प्रतिशत, पश्चिम बंगाल 13.70 प्रतिशत, झारखंड 12.35 प्रतिशत, राजस्थान में 12 प्र्रतिशत, पंजाब, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और उत्तराखंड में 11 प्रतिशत से अधिक महिला विधायक हैं। बिहार और हरियाणा में 10 प्रतिशत से अधिक महिला विधायक हैं।
आंध्र प्रदेश, असम, गोवा, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, केरल, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, ओडिशा, सिक्किम, तमिलनाडु और तेलंगाना में महिला विधायकों का प्रतिशत 10 से कम है। राष्ट्रीय औसत की बात करें तो देश में महिला विधायकों का प्रतिशत नौ प्रतिशत है। यानि उक्त राज्यों में अभी महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को लेकर खास चर्चा नहीं है। ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि अब इसके लागू होने से पहले तमाम राजनीतिक परिस्थितियों का बड़ा रोल होगा।

