उत्तराखंड

आपदा राहत के नाम पर केंद्र की घोषणा को कांग्रेस ने बताया निराशाजनक

ऋषि टाइम्स न्यूज

देहरादून। आपदा राहत के नाम पर उत्तराखंड को 1200 करोड़ की मदद की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा को कांग्रेस ने राज्य के लिए निराशाजनक बताया।

कांग्रेस के दिग्गज नेता एवं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि बीते रोज देश के प्रधानमंत्री उत्तराखंड राज्य आए तो हमें यह अपेक्षा थी कि राज्य सरकार ने जो 5702 करोड़ का प्रस्ताव आपदा में हुए नुकसान को लेकर उनके सम्मुख रखा है वह उसका मान रखते हुए उसे स्वीकार करेंगे लेकिन बड़े खेद का विषय है कि उन्होंने राज्य में आई इतनी भीषण आपदा के लिए राहत राशि के तौर पर मात्र 1200 करोड़ की घोषणा की जो कि बहुत ही निराशाजनक है।

कहा कि राज्य में 2013 की दैवीय आपदा जब आई थी तो कांग्रेस की गठबंधन सरकार केंद्र और राज्य में भी कांग्रेस की सरकार थी उस वक्त हमने दैवीय आपदा के मानकों में व्यापक स्तर पर परिवर्तन किए थे। उसी का नतीजा था कि हम आपदा प्रभावितों का पुनर्वास और विस्थापन करने में सफल हो पाए और आपदा को काबू कर पाए। इस वक्त जो केंद्र सरकार से उत्तराखंड राज्य में आपदा आई है उसके लिए जो धनराशि आवंटित की गई है वह नाकाफी है और राज्य सरकार से हमारी यह अपेक्षा रहेगी कि वह मजबूत पैरवी करके जो क्षति राज्य को आपदा से हुई है उसकी प्रतिपूर्ति करेगी।

कांग्रेस नेता प्रीतम सिंह ने यह भी कहा की मलिन बस्तियों को उजाड़ने का जिस तरह से षड्यंत्रकारी काम एलिवेटेड रोड के नाम से राज्य सरकार द्वारा उठाए जा रहा है हम उसका भी विरोध करते हैं। जब भी मलिन बस्तियों पर कोई विपत्ति आई है तो कांग्रेस ने हमेशा उनके साथ खड़े होने का काम किया है। हमारी सरकार में 582 मलिन बस्तियों को चिन्हित करने का काम किया गया था और उनको मालिकाना हक देने का काम प्रगति पर था। हमने उन्हें संरक्षण देने का भी वादा किया था और यह एक्ट विधानसभा से पारित है और जिस तरह का आज का राज्य सरकार का रवैया और कृत्य है हम उसका पुरजोर शब्दों में निंदा करते और भर्त्सना करते हैं।

प्रेस वार्ता में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि राज्य के लोगों की प्रधानमंत्री से बड़ी अपेक्षा थी कि कम से कम राज्य सरकार द्वारा जो आंकलन क्षति का दिया गया है उसके सापेक्ष पर्याप्त धनराशि राज्य को उपलब्ध कराएंगे।परंतु जो धनराशि घोषित की गई है उसने राज्यवासियों को भी और आपदा पीड़ितों को भी निराश किया है,उनकी जो आकांक्षाएं और अपेक्षाएं पुनर्वास और पुनर्निमाण की थी उसको झटका लगा है।रावत ने कहा कि हम ये सोच रहे थे कि देश के प्रधानमंत्री इन हिमालय क्षेत्रों में आ रही आपदाओं को कैसे कम किया जाए और कैसे सामना किया जाए इस पर कोई राष्ट्रीय नीति की घोषणा करेंगे या कम से कम नीति बनाने का संकेत देंगे।

बादल फटना,ग्लेशियर पिघलना इन सब पर बहुत कुछ कहा जा चुका है। मूल समस्या ये नहीं कि हमने अत्यधिक पेड़ काट दिए या सड़के बना दी, यदि ऐसा होता तो राज्य के जो भूभाग 70 प्रतिशत वनआच्छादित हैं वहां बादल नहीं फटते। मध्य उच्च हिमालई क्षेत्रों में यह घटनाएं सर्वाधिक हो रही हैं और इसका दुष्प्रभाव सभी क्षेत्रों पर पड़ रहा है, जिसमें हमारे मैदानी भाबर के क्षेत्र भी शामिल है, और यह लंबे समय से हो रहा है। प्रधानमंत्री जी कई बार यहां आए और उन्होंने इस पावन धरती पर दो-तीन बार तप भी किया लेकिन इस महत्वपूर्ण विषय पर की जलवायु परिवर्तन का जो मध्य हिमालय क्षेत्रों में जो व्यापक स्तर पड़ रहा है हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड उसका सामना करने के लिए प्रधानमंत्री कोई राष्ट्रीय रणनीति पर कुछ बोलकर नहीं गए।

पूर्व सीएम रावत ने कहा कि या तो राज्य सरकार अपने प्रतिवेदन में इस बात को रख नहीं पाई या फिर प्रधानमंत्री ने उनकी सुनी नहीं। उन्होंने कहा कि ये हतप्रभ करने वाला है कि प्रधानमंत्री इतने सारे आपदा ग्रस्त क्षेत्र में गए लेकिन आपदा का जो सबसे प्रभावी कारण है जिसकी वजह से मध्यहिमालयी क्षेत्र आहत हो रहा है बड़ी-बड़ी आपदाएं आ रही हैं हमारा जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है हमारे हिमालय क्षेत्र में रह रहे लोगों की आजीविका में इसका गहरा असर हो रहा है हमारी संस्कृति इत्यादि सब प्रभावित हो रहे हैं यह बड़ा दुख का विषय है कि प्रधानमंत्री जी ने इस पर कोई चिंता जाहिर नहीं की।

कहा कि 2013 की दैवीय आपदा को आप आज की आपदा से तुलना नहीं कर सकते। 2013 में हमने लोगों को यदि पांच लाख दिए तो आप आज 12 साल बाद भी 5 लाख पर अटके हुए हैं? आप प्रीतम युग के आपदा मानकों पर क्यों चल रहे हैं? कॉस्ट आफ कंस्ट्रक्शन बढ़ गया है, हर चीज की कीमतों में बढ़ोतरी हो गई है तो फिर राहत राशि भी धामी युग या डबल इंजन की तर्ज पर होनी चाहिए।

12 साल पहले आपदा के जो मानक थे उन् मानकों से आप आज लॉस की कास्ट नहीं निर्धारित कर सकते। आपदा के मानक हमारे क्षेत्र के पर्यावरणीय स्थिति को मध्य नजर रखते हुए होने चाहिए, 16 गांव है जिनका नाम सोल गांव पट्टी है सारे रास्ते उनके कट गए हैं केवल एक हेलीकॉप्टर से वहां अभी तक राहत/राशन पहुंचा है। हरीश रावत ने कहा कि कई क्षेत्रों में सहायता राशि जो ₹5 लाख की धनराशि है वो मेरे पहुंचने तक वितरित नहीं की गई थी।

 

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